मंत्रिमंडल शासन पद्धति का विकास | Development of Cabinet Administration System
मंत्रिमंडल शासन पद्धति का विकास | Development of Cabinet Administration System
संसद की प्रभुसत्ता की स्थापना – संसद की प्रभुसत्ता ने इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठने के वंशपरम्परागत और दैवी अधिकारों के सिद्धांत को खत्म कर दिया। भविष्य में इंग्लैंड का कोई भी राजा सिंहासन पर आरूढ़ होने के ईश्वर प्रदत्त अधिकार का दावा नहीं कर सकता था। यद्यपि इंग्लैंड के राज्य सिंहासन पर स्टुअर्ट वंश का अधिकार था पर जनता की प्रतिनिधि संसद ने हैनोवर वंश के वंशज को इंग्लैंड का राज मुकुट भेंट करके स्पष्ट कर दिया कि उत्तराधिकारी के सवाल पर जनता की राय का विशेष महत्व है। जनता अपनी इच्छा से पैतृक अथवा दैवी अधिकारों को अस्वीकार कर सकती है।
जनता की इच्छा से राज्य सिंहासन किसी भी राज कुमार को प्राप्त हो सकता है। किसी भी राजा को मात्र जनता का कल्याण करके ही शासन करने का अधिकार है। संसद के अलावा किसी को यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं है कि सिंहासन पर किसका अधिकार होगा। इस प्रकार संसद राज्य शक्ति का स्रोत बन गई। इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठने के लिए कई दावेदार थे, लेकिन इंग्लैंड का सिंहासन संसद के द्वारा सन् 1709 ई. में पास ‘ऐक्ट ऑफ सेटलमेंट’ के अनुसार जार्ज प्रथम को ही दिया गया। संसद के अन्य दावेदारों के दावे इनकार कर दिये गये । हैनोवर वंश के सिंहासन पर आसीन होने से संसद को यह फायदा हुआ कि उसकी अवधि लम्बी हो गयी। ‘ट्रिनियल’ ऐक्ट के अनुसार संसद की अवधि तीन वर्ष निश्चित हो गयी थी, परन्तु सन् 1716 ई. में संसद ने ‘सप्तवर्षीय कानून’ ( Septennial Act) पास किया, जिसके अनुसार संसद का कार्यकाल सात वर्ष के लिए निर्धारित कर दिया गया।
व्हिग दल का प्रभुत्व – सन् 1715 ई. में जार्ज प्रथम के राजा बनने के एक वर्ष उपरान्त राजवंश के खिलाफ एक भयंकर विद्रोह अपदस्थ राजा जेम्स द्वितीय और उसके वंशजों के समर्थकों ने खड़ा किया था। वे जैकोबाइट कहलाते थे। जैकोबाइट विद्रोहियों ने जेम्स द्वितीय के पुत्र जेम्स एडवर्ड को इंग्लैंड के सिंहासन पर आरूढ़ करने का प्रयत्न किया और स्कॉटलैंड तथा फ्रांस से उसे मदद प्राप्त होने लगी। टोरी दल के नेता बोलिंगब्रूक ने जैकोबाइट विद्रोह का समर्थन किया । जैकोबाइट के दोनों विद्रोहों को कुचल दिया। इन विद्रोहों के फलस्वरूप टोरियों पर राजा का भरोसा न रहा। अतएव आगामी पचास वर्षों तक के लिए इंग्लैंड की राजनीति पर व्हिग दल का कब्जा बना रहा।
व्हिग दल हैनोवर-वंश का समर्थन करता था। वस्तुतः सिंहासन पर जार्ज प्रथम को उसी ने आरूढ़ कराया था। अतः जार्ज प्रथम के मंत्रिमंडल में व्हिग दल के नेताओं को शामिल किया गया। जार्ज प्रथम की इंग्लैंड के राजनीतिक झगड़ों तथा शासन पद्धति के सम्बन्ध में पर्याप्त ज्ञान न था। अतएव उसने समस्त कार्य व्हिग के नेताओं पर छोड़ दिये। इसका नतीजा यह हुआ कि देश का शासन प्रबंध पूर्णतया व्हिगों के पास आ गया।
कैबिनेट – प्रथा का विकास- हैनोवर वंश के शासनकाल में कैबिनेट शासन प्रणाली का भी विकास हुआ। जार्ज प्रथम इंग्लैंड की सभ्यता, संस्कृति और राजनीति से अनजान था। उसे अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं था। अतः उसकी राज-काज में कोई रुचि नहीं थी। वह मंत्रिमंडल की बैठकों में शामिल होता था, परन्तु अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं था और उसके मंत्रियों को जर्मन भाषा का ज्ञान नहीं था, अतः वे एक-दूसरे के विचारों को नहीं समझ पाते थे। जार्ज प्रथम कुछ समय तक तो शांतिपर्वक मंत्रियों के वाद-विवाद को सुनता रहा, परन्तु जब उसकी समझ में कुछ नहीं आया तो उसने बैठकों से अनुपस्थित रहना शुरू कर दिया और अन्त में बिल्कुल ही आना बन्द कर दिया।
मंत्रियों को भाषण की स्वतंत्रता प्राप्त थी और अब उन्हें राजा की उपस्थिति की भी चिन्ता नहीं थी, अत: वे स्वतंत्रतापूर्वक वाद-विवाद करते और अन्त में कोई निश्चय पर पाते। एक ही दल का मंत्रिमंडल था । उस पर किसी का दबाव कुछ भी नहीं था। पहले कैबिनेट की बैठकों में राजा अध्यक्ष होता था। पर अब राजा की अनुपस्थिति के कारण सबसे वयोवृद्ध मंत्री अध्यक्ष बनने लगा। इस प्रकार एक नवीन अधिनियम बना, कैबिनेट की बैठकों में अध्यक्षता करने वाला तथा मंत्रियों की ओर से राजा को उनका संदेश पहुँचाने वाले व्यक्ति को मंत्रियों का नेता मान लिया गया। कालान्तर में उसे प्रधानमंत्री का पद प्रदान किया गया। वालपोल इंग्लैंड का प्रथम प्रधानमंत्री था।
दल – प्रथा का उत्थान- हैनोवर वंश के शासन पर अधिकार ने इंग्लैंड में दल प्रथा की स्थापना के लिए आधार तैयार कर दिया। काफी समय तक इंग्लैंड के सिंहासन पर हैनोवर वंश के आरूढ़ होने के अधिकार पर वाद-विवाद होता रहा । टोरी के समर्थक इंग्लैंड के सिंहासन पर स्टूअर्ट-वंशीय राजा चाहते थे। व्हिग दल के समर्थक हैनोवर-वंश के समर्थक थे। टोरी दल की हार ने संसद मे व्हिग दल को बहुमत प्रदान किया। आगामी पचास वर्षों तक वह दल बहुमत में रहा। जब जार्ज तृतीय के व्हिग दल की शक्ति छीन ली, तब टोरी दल सत्ता में आया । जार्ज तृतीय के समय से दल प्रथा दृढ़ नींव पर आध रित की गयीं।
अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति- इंग्लैंड पर हैनोवर वंश का प्रभुत्व होने के फलस्वरूप इंग्लैंड यूरोप के राजनीतिक झगड़ों की लपेट में आ गया। हैनोवर वंश के शासक हैनोवर राज्य के सम्बन्ध में चिंतित रहा करते थे। हैनोवर जर्मनी का एक छोटा सा राज्य था। जार्ज प्रथम और जार्ज द्वितीय ने हैनोवर की रक्षा को ध्यान में रखकर अपनी बाह्य नीति का निर्धारण करने के लिए इंग्लैंड के मंत्रियों को विवश किया । हैनोवर के कारण ही इंग्लैंड ने आस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध में भूमिका निभाई थी। जार्ज द्वितीय ने स्वयं युद्ध का संचालन किया।
सप्तवर्षीय युद्ध में जब पिट ने हैनोवर की रक्षा को ध्यान में नहीं रखा तो सन् 1757 ई. में जार्ज द्वितीय द्वारा उसे पदच्युत कर दिया गया। इस प्रकार इंग्लैंड के सिंहासन पर हैनोवर वंश के अधिकार ने व्हिग और टोरी के भाग्य का निर्णय करने के साथ-साथ यूरोप के राजनीतिक क्षेत्र में होने वाले बदलावों को भी प्रभावित किया। इसके फलस्वरूप कैबिनेट प्रथा विकसित होने लगी तथा सत्रहवीं शताब्दी के वैधानिक संघर्ष की समाप्ति हो गई।
मंत्रिमंडल प्रथा का विकास
प्रधानमंत्री का पद- जार्ज प्रथम बूढ़ा व्यक्ति था। उसे अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं था, उसमें इंग्लैंड की राजनीति को समझने की सामर्थ्य का भी अभाव था। उसके पुत्र जार्ज द्वितीय ने भी इंग्लैंड के मामलों में उदासीनता प्रदर्शित की। यद्यपि उसने अंग्रेजी भाषा का थोड़ा सा ज्ञान प्राप्त कर लिया था, तथापि भाषा सम्बन्धी कमजोरी होने के कारण उसने मंत्रियों की सभा में न जाने का निश्चय किया। इस समय तक कैबिनेट, शासन का एक प्रमुख अंग बन गयी थी। राजा की नीतियाँ उसी के द्वारा तय होती थीं, अत: सभापति का पद खाली नहीं छोड़ा जा सकता था। सभापति पद की पूर्ति के लिए कैबिनेट के सदस्यों में से ही सर्वाधिक योग्य मंत्री को चुना जाने लगा। कालान्तर में वह प्रधानमंत्री बन गया।
मंत्रियों का उत्तरदायित्व- इस काल में राजा पर राज्य का भार न था, इसका कारण यह था कि राजा ने शासन का सम्पूर्ण दायित्व मंत्रियों पर डाल दिया था, पहले राजा मंत्री की सलाह लिया करता था तथा शासन किया करता था, परन्तु अब मंत्री ही राजा के द्वारा शासन करने लगे। मंत्री राजा की सहमति लेकर शासन कार्य चलाता था। मंत्री ने राजा की सहमति से फैसले भी देना शुरू कर दिया। कैबिनेट के निर्णय की सूचना राजा को भेज दी जाती। राजा उसमें कोई बदलाव किये बिना दस्तखत कर देता था। पहले राजा संसद द्वारा पास कानून को अस्वीकृत कर सकता था, किन्तु अब एक कानून बना दिया गया कि संसद द्वारा पास किये गये कानून को राजा अस्वीकृत नहीं कर सकता था।
कामन्स-सभा की प्रधानता- ऐसी स्थिति में कानूनों की भी उचित व्यवस्था होने लगी। कैबिनेट प्रणाली विकसित होने के साथ-साथ कामन सभा को भी प्रधानता प्राप्त होने लगी। सन् 1688 ई. के उपरान्त कानून एवं कर व्यवस्था का भार कामन्स सभा को दिया गया। सन् 1714 ई. से राज्य के शासन प्रबंध पर इसके प्रभाव में वृद्धि हुई। शासन का उत्तरदायित्व राजा के स्थान पर मंत्रियों पर आ गया। कामन्स सभा का विश्वास खोने पर मंत्री को हट जाना पड़ता था।
वालपोल का योगदान- कैबिनेट प्रथा के विकास में वालपोल की महत्वपूर्ण भूमिका है। यद्यपि मंत्रियों के मनोनयन का सिद्धांत वालपोल के समय में बहुत पहले स्थापित हो चुका था, पर प्रधानमंत्री के पद का निर्माण नहीं हो सका। वालपोल से पूर्व यह सिद्धांत नहीं बन सका था कि कामन्स सभा द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पास किये जाने पर उसे इस्तीफा दे देना चाहिए । प्रधानमंत्री की सर्वोच्चता के सिद्धांत का निर्माण वालपोल के समय में ही हुआ। इससे पूर्व व्यवस्था यही थी कि राजा कैबिनेट को आमंत्रित करता था। वही मंत्रियों का मनोनयन करता था तथा उन्हें पद से मुक्त कर देता था।
जार्ज प्रथम एवं जार्ज द्वितीय ने इस कार्य में अधिक रुचि नहीं ली। वालपोल को कैबिनेट में परिषदों का सभापति बनाया गया। उसे कुछ अधिकार दिये गये। इस प्रकार प्रधानमंत्री पद का निर्माण हुआ। इस प्रकार यह कहा जाता है कि वालपोल इंगलिश इतिहास का प्रथम प्रधानमंत्री था। वालपोल का विचार था कि कैबिनेट का प्रत्येक सदस्य समान राजनीतिक लक्ष्य अपनाये।
वालपोल ने डाउनशैंड को कैबिनेट से इस कारण निकाल दिया था कि उसने वालपोल की विदेश नीति के प्रति असन्तोष प्रकट किया था। चेस्टरफील्ड को ‘आबकारी विधेयक’ (Exicse Bill) का विरोध करने पर हटा दिया गया था। सन् 1719 ई. में परिस्थितियाँ इस प्रकार बदलीं कि कामन सदन में वालपोल का बहुमत कम हो गया। वह स्वेच्छा से अपने पद पर कार्य कर सकता था, इसका कारण यह था कि राजा व रानी की नजर में वह उपयुक्त था । पर उसने त्यागपत्र देकर यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि हाउस ऑफ कामन्स (House of Commons) के विश्वास पर ही इस पद पर कार्य किया जा सकता है । इसी दौरान यह निर्धारित हुआ कि प्रधानमंत्री तथा कैबिनेट कामन सभा के प्रति जिम्मेवार रहेंगे। लार्ड सभा की तुलना में कायम सभा की शक्ति बढ़ गई थी ।
कैबिनेट – प्रथा की अपूर्णता- प्रथम दो जार्जों के समय कैबिनेट प्रथा काफी विकसित हुई, पर उसमें अभी भी काफी अपूर्णता थी । उदाहरणार्थ—
1. प्रधानमंत्री का पद अभी तक वैध नहीं हो सका था। अभी यह पद अलोकप्रिय था। मंत्री इस पद पर आरूढ़ रहने पर स्वयं को इस नाम से सम्बोधित करवाना चाहते थे।
2. सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत स्थापित नहीं हो सका था । विभिन्न मंत्री राजा को अपना-अपना स्वतंत्र परामर्श दिया करते थे।
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