सम्राट एडवर्ड सप्तम 1901-1910 ई. | Emperor Edward VII 1901-1910 A.D.
सम्राट एडवर्ड सप्तम 1901-1910 ई. | Emperor Edward VII 1901-1910 A.D.
महारानी विक्टोरिया की मृत्यु के पश्चात उसका सबसे बड़ा लड़का एडवर्ड सप्तम के नाम से ब्रिटेन का सम्राट बना। उसका जन्म 1841 ई. में हुआ था। इसलिए जब वह शासन बना तो उसकी आयु 60 वर्ष थी। उसने एडिनबरा, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज आदि विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उसने फ्रांस, कनाडा, उत्तरी अमेरिका, फिलिस्तीन और यहाँ तक कि भारत आदि दूर-दूर के देशों की यात्रा कर रखी थी। एडवर्ड सप्तम ने अपने राज्यकाल में एक संवैधानिक शासक के रूप में ही कार्य करने का प्रयास किया। उसने स्वयं एक बार कहा था, “मैंने दृढ़ निश्चय कर रखा है कि मैं बिल्कुल एक संवैधानिक शासक के रूप में कार्य करूँगा और जब तक मेरे शरीर में जान है मैं जनता की भलाई और हित हेतु कार्य करता रहूँगा।”
एडवर्ड सप्तम का जीवन चरित्र
एडवर्ड सप्तम का जन्म सन् 1841 ई. को हुआ था। बाल्यावस्था से ही उसे भ्रमण करने और घोड़े की सवारी का शौक था। प्रिंस एल्बर्ट उसे उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे। उन्हें घर पर एवं विद्यालय में शिक्षा दिलाने का प्रयास किया गया, परन्तु एडवर्ड का शिक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं था। पिता की मृत्यु हो जाने पर प्रिंस एडवर्ड को लन्दन के फेशनेबल समाज का नेता माना गया। लेकिन दुर्भाग्य से एडवर्ड को मदिरापान तथा सुन्दरियों की संगति की लत लग गई। इसलिए प्रिंस एडवर्ड की लोकप्रियता को ग्रहण लग गया। उन्होंने फ्रांस, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, फिलीस्तीन तथा भारत की यात्रा की थी।
एडवर्ड सप्तम की विदेश नीति
एडवर्ड सप्तम वैदेशिक मामलों में विशेष रुचि रखता था एन्सर का कथन है – “विभिन्न यूरोपीय शासकों तथा राजनीतिज्ञों से निकट सम्बन्धों के कारण वह अन्तर्राष्ट्रीय मामलों को काफी हद तक प्रभावित कर सका। अपने सरल स्वभाव के कारण उसने जो भी काम किया वह वास्तविक सिद्ध हुआ। ” एडवर्ड सप्तम ने वैदेशिक क्षेत्र में निम्नांकित कार्य किये—
(i) जापान से समझौता 1902 ई.— इंग्लैण्ड ने 1815 ई. के पश्चात यूरोपीय राजनीति से पृथक रहने की नीति अपनाई। अगले कोई 50-60 वर्षों तक वह लगभग इस नीति पर चलता रहा। जर्मनी के शक्तिशाली होने के कारण ब्रिटेन को विवश होकर ‘शानदार पृथक्त्व’ की नीति को त्यागना पड़ा। रूस और जर्मनी की शक्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ब्रिटेन ने 1902 ई. में जापान के साथ एक संधि की जिसके अनुसार दोनों ने जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद करने का वचन दिया।
(ii) फ्रांस के साथ संधि 1904 ई.— फ्रांस और ब्रिटेन काफी वक्त से एक दूसरे के शत्रु चले आ रहे थे, परन्तु जर्मनी के शक्ति पकड़ने के कारण उन्हें एक-दूसरे के निकट आना पड़ा। 1930 ई. में उसने फ्रांस की यात्रा की और वहाँ के राजनीतिज्ञों से मिलकर आपसी मतभेदों को दूर करने का भरसक प्रयास किया। फ्रांस के राष्ट्रपति लूवे ने भी ब्रिटेन के यात्रा की और इस प्रकार आपसी बातचीत के फलस्वरूप फ्रांस और ब्रिटेन दोनों देशों में 1904 ई. में आपस में एक संधि हो गई जो इतिहास में आंग्ल-फ्रांस समझौते के नाम से प्रसिद्ध है। इस संधि के अनुरूप दोनों ने एक-दूसरे को आर्थिक और सैनिक मदद देने का वचन दिया । आपसी झगड़ों का शांतिपूर्ण ढंग से निपटारा करना स्वीकार किया। फ्रांस ने मिस्र और सूडान पर अंग्रेजों का आधिपत्य स्वीकार कर लिया, ब्रिटेन ने भी मोरक्को, नाइजीरिया, मैडागास्कर और न्यूफाउंडलैण्ड आदि में फ्रांसीसी हितों को मान्यता दे दी।
(iii) रूस से समझौता 1907— रूस और इंग्लैण्ड में भी काफी पुराना झगड़ा था। 1904-05 ई. में जापान और रूस के आपसी युद्ध में ब्रिटेन के माध्यम से जापान का पक्ष लिये जाने के कारण रूस वालों के मन में ब्रिटेन के घृणा थी। जर्मनी के तीव्र गति से शक्तिशाली होने के कारण फ्रांस के माध्यम से दो मित्रों (इंग्लैण्ड और रूस) में मित्रता स्थापित करने के कारण ब्रिटेन और रूस में 1907 ई. में एक समझौता हो गया। इस संधि के अनुरूप दोनों देशों मे ईरान को अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों में बाँट लिया। रूस ने अफगानिस्तान और तिब्बत में अपने हितों को छोड़ दिया जबकि ब्रिटेन ने बाल्कन में रूस का विरोध करना छोड़ दिया।
गृह नीति
ब्राह्य क्षेत्र की भाँति एडवर्ड सप्तम ने आन्तरिक क्षेत्र में भी काफी नाम पाया है। उसके अधीन तीन मंत्रिमण्डलों का गठन हुआ। 1902 से 1905 ई. तक बेल्फोर का मंत्रिमण्डल रहा। 1905 से 1908 ई. तक कैम्पबेल बैनरमैन का मंत्रिमण्डल और 1908 से 1901 ई. तक एस्क्विथ का मंत्रिमण्डल रहा । उसके शासनकाल में विभिन्न क्षेत्रों में काफी सुधार हुआ।
(1) लेबर पार्टी का उदय— इससे पहले ब्रिटेन में विवरल और कन्जवेंटिव अथवा टोरी और विग्र आदि दो दल थे परन्तु 1906 ई. में तीसरे दल की भी स्थापना हुई । इस श्रमिक दल का मुख्य कार्य श्रमिकों को संगठित करके उन्हें सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाना था। यह दल 1927 ई. के चुनावों में पहली बार अपना मंत्रिमण्डल बनाने में सफल हुआ।
(2) उदारवादी दल का फिर से शक्ति पकड़ना— इंग्लैण्ड में ग्लैडस्टोन के पश्चात उदारवादी दल की शक्ति काफी क्षण हो गयी। तब से ब्रिटेन में टोरी दल की शक्ति तेजी से बढ़ने लगी। टोरी दल के नेता आयरलैण्ड के प्रश्न को हल करने में असफल रहे और इनके नेता बेल्फोर ने त्याग पत्र दे दिया। उसके उपरान्त फिर से उदारवादी दल लोकप्रिय होने लगा। 1905 ई. में कैम्पवेल वैनरमैन के अधीन और 1908 ई. एस्क्विथ के अधीन एक के उपरान्त दूसरे उदारवादी दल के मंत्रिमण्डल स्थापित हो गए।
(3) आन्तरिक क्षेत्र में कई सुधारवादी कानूनों का पास होना— एडवर्ड सप्तम के शासनकाल में आन्तरिक क्षेत्र में कई सुधार किए गए जो निम्न प्रकार हैं—
(i) स्कूल बोडों को 1902 ई. के शिक्षा अधिनियम के माध्यम से तोड़ दिया गया और स्कूलों का प्रबन्ध स्थानीय काउण्टी परिषदों को सौंपा गया।
(ii) 1904 ई. में आयरिश भूमि क्रम अधिनियम पास किया गया, जिसके अनुसार आयरलैंड में खेती करने वाले कृषकों को अपनी भूमि खरीदने का अधि कार दिया।
(iii) ‘क्षतिपूर्ति अधिनियम के माध्यम से बीमारी, चोट लगने आदि की अवस्था में कारीगरों को हर्जाना देने की व्यवस्था की गई ।
(iv) 1909 ई. में ही भोजन की व्यवस्था करने सम्बन्धी कानून पास किया गया, जिसके अनुसार स्कूल जाने वाले हर बच्चे को खाना दिए जाने की व्यवस्था की गई।
(v) 1907 ई. के ‘डाक्टरी जाँच सम्बन्धी कानून’ के अनुरूप ब्रिटेन में प्रत्येक बच्चे की डाक्टरी जाँच अनिवार्य कर दी गई।
(vi) 1907 ई. में ‘प्लूरल वोटिंग एक्ट’ के माध्यम से यह कानून पास किया गया कि एक व्यक्ति को एक ही वोट डालने का अधिकार हो और वह अपना वोट अपने ही चुनाव क्षेत्र में डाले।
(vii) एक अन्य कानून के माध्यम से कोयले की खानों में काम करने वाले श्रमिकों के काम करने के 8 घण्टे निश्चित किये गए।
(viii) 1909 ई. स्वीटिड इण्डस्ट्रीज एक्ट के माध्यम से श्रमिकों के वेतन व कार्य करने की अवस्थाओं को नियमित करने का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त अन्य एक्टों के माध्यम से अनेक सुधार किए। उसने बाल अधिनियम, सेना अधिनियम, स्वीटिड इण्डस्ट्रीज एक्ट, लेबर एक्सचेंजों की व्यवस्था आदि एक्टों के माध्यम से समाज के निर्धन तथा कमजोर वर्गों को ऊँचा उठाने का प्रयत्न किया।
संसद के दोनों सदनों में सम्बन्ध— लार्ड एस्क्विथ के नेतृत्व में ब्रिटेन में उदार दल का मंत्रिमण्डल स्थापित हुआ। वित्त मंत्री लायड जार्ज ने 1909 ई. में ब्रिटेन से निर्धनता उन्मूलन करने के उद्देश्य से पार्लियामेण्ट में अपना बजट पेश किया तो पार्लियामेण्ट के दोनों सदनों में भारी मतभेद उत्पन्न हो गया। यह मतभेद 1911 ई. में दूर हुआ, जब कामन सभा का महत्व लार्ड सभा के मुकाबले बढ़ गया।
इस प्रकार स्पष्ट है कि एडवर्ड सप्तम ने आन्तरिक तथा वाह्य क्षेत्र में काफी सुधार किया और गरीबों की दशा को सुधारने के प्रयत्न किए।
एडवर्ड सप्तम के शासन काल की अन्य घटनाएँ
दूसरा एडवर्ड सप्तम के शासन में तीन मंत्रिमण्डलों ने ब्रिटेन में कार्य किया। बाल्फोर के माध्यम से प्रथम मंत्रिमण्डल, कैम्पबैल बौनरमैन के माध्यम से मंत्रिमण्डल एवं एस्क्विथ के माध्यम से अंतिम व तीसरे मंत्रिमण्डल का गठन किया गया था। इनके समय की प्रमुख घटनाएँ आगे व्यक्त की गई हैं—
श्रमिक दल का जन्म— महारानी विक्टोरिया के शासन की समाप्ति तक ब्रिटेन में दो राजनीतिक दल थे-टोरी दल और ह्रिग दल। एडवर्ड सप्तम के शासन में श्रमिक दल नामक तीसरे दल की स्थापना की गयी। सन् 1906 ई. में यह दल प्रथम बार लोकसभा का सदस्य बना।
उदार दल का उत्कर्ष— सन् 1894 ई. में प्रधानमंत्री ग्लैडस्टन ने अपना पद छोड़ दिया, जिससे उदार दल के प्रभाव और शक्ति में ह्यस पैदा होने लगा एवं रूढ़िवादी दल के प्रभाव में बढोत्तरी होने लगी। रूढ़िवादी दल की एक शाखा यूनियनिस्ट के नाम से प्रसिद्ध थी जो आयरलैंड का ब्रिटेन के साथ एकीकरण की समर्थक थी। लार्ड बाल्फोर एवं सेलिसबरी इसी दल के प्रतिनिधि थे। 1905 ई. में बाल्फोर को पद त्याग करना पड़ा। फलस्वरूप उदार दल को कैम्पबैल बोनरमैन के नेतृत्व में पुनः शासन में अधिकार प्राप्त हुए। कैम्पबैल ने अस्वस्थ होने के कारण प्रधानमंत्री पद त्याग दिया। सन् 1908 ई. में लार्ड एस्क्विथ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने लगभग दस वर्ष तक प्रशासनिक कार्यों को योग्यतापूर्वक सम्पन्न करके उदार दल की बहुत अधिक उन्नति की।
व्यापारिक एवं सामाजिक सुधार— एडवर्ड सप्तम के शासन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण व्यापारिक एवं सामाजिक सुधार किए गये—
1. शिक्षा विधेयक— 1902 ई. में शिक्षा विधेयक पास करके स्कूलों के बोर्ड की समाप्ति कर दी गई और विद्यालयों के प्रबंध का कार्य काउण्ट्री कौंसिलों को दिया गया, जिससे स्थानीय अधिकारी शिक्षा की देखभाल और व्यवस्था करने लगे।
2. आयरिश भूमि खरीद अधिनियम— (1904) इस अधिनियम के अनुसार आयरलैंड के कृषकों को अपनी जोत की भूमि खरीदने का अधिकारी मान लिया गया।
3. स्वीटेड उद्योग अधिनियम— (1904) इस अधिनियम के माध्यम से श्रमिकों के वेतन तथा कार्य सम्बन्धी नियमों को निर्मित किया गया एवं ट्रेड बोर्ड स्थापित किये गये, जिनमें उद्योगपतियों तथा श्रमिकों के प्रतिनिधि बैठकर कारखानों हेतु नियम बनाने लगे।
4. श्रमिक क्षतिपूर्ति अधिनियम— (1906) इस अधिनियम के माध्यम से कल-कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों को बीमारी का भत्ता देने की व्यवस्था की गई एवं कारखाने में कार्य करते समय हाथ-पैर कट जाने पर अथवा अपंग हो जाने की स्थिति में श्रमिक को क्षतिपूर्ति देने का प्रबंध किया गया।
5. व्यापारिक झगड़ा अधिनियम— (1906) इस अधिनियम के माध्यम से शांतिपूर्ण धरना देने को वैध बना दिया गया।
6. गणना अधिनियम— इस अधिनियम के माध्यम से 1906 में कारखानों में बनाये गये व्यापारिक माल की गणना हेतु वैज्ञानिक विधि अपनाने की व्यवस्था की गई।
7. लेबर एक्सचेंज— मार्केट व्यवस्था में सरलता एवं सुगमता लाने हेतु यह स्थापित किया गया। इससे बेकार व्यक्तियों को कारखानों में काम दिलाने का भी प्रबन्ध किया गया।
8. हाउसिंग तथा टाउन प्लानिंग अधिनियम— (1906) इसके माध्यम से स्थानीय अधिकारियों को गंद तथा स्वास्थ्य हेतु हानिप्रद मकानों को गिराकर उनके स्थान पर अच्छे प्रकाशयुक्त और हवादार घरों का सृजन कराने का अधिकार दिया गया।
9. खाद्य अधिनियम— (1907) विद्यालयों के बालकों को विद्यालय की ओर से अल्प आहार देने की व्यवस्था की गयी तथा प्रत्येक विद्यार्थी का डॉक्टरी परीक्षण भी अनिवार्य बना दिया गया।
10. वृद्धावस्था पेंशन— (1910) 70 वर्ष अथवा उससे अधिक उम्र के वृद्ध व्यक्तियों को पेंशन देने की सरकार की ओर से व्यवस्था की गयी ।
11. सेना अधिनियम— ( 1907) सेना अधिनियम पास कर सरकार ने अंग्रेजी सेना का पुर्नगठन किया।
12. प्लूरल वोटिंग अधिनियम— इस अधिनियम के अन्तर्गत एक व्यक्ति एक मत के सिद्धांत को मान्यता दी गयी।
13. स्वतंत्र व्यापार अधिनियम— इसके अनुरूप व्यापार में स्वतंत्र नीति का अनुसरण किया गया। अनेक पदार्थों पर आयात कर समाप्त कर दिया गया एवं कुछ विशिष्ट वस्तुओं पर आयात कर में कमी कर दी गयीं अन्य देशों के माल की अपेक्षा उपनिवेशों से आयात किये जाने वाले माल पर आयात कर में अधिक कमी की गयी ।
14. स्माल होल्डिंग अधिनियम— काउण्टी कौंसिलों को यह अधिकार दिया गया कि वे भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों को खरीदने के अभिलाषी व्यक्तियों को भूमि दिलाने की व्यवस्था करें।
मूल्यांकन
एडवर्ड सप्तम ने दस वर्ष की कम अवधि में इतनी अधिक लोकप्रियता अर्जित कर ली थी जिस कारण उन्हें अपने देश के इतिहास में एक उल्लेखनीय स्थान प्राप्त हुआ। इस काल में उद्योग धन्धों तथा विदेशी व्यापार में आश्चर्यजनक विकास हुआ। मेरियट के अनुसार “सम्राट में कोई जातिगत ईर्ष्या की भावना नहीं थी। उसे न मात्र अपनी प्रजा का आदर प्राप्त हुआ बल्कि विदेशों में भी पर्याप्त सम्मान प्राप्त था।” प्रधानमंत्री लार्ड एस्क्विथ ने सम्राट के स्वर्गवास के उपरान्त उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा था कि “इंग्लैंड हेतु अत्यन्त नाजुक समय बिना किसी चेतावनी या पूर्ण तैयारी के हमने एक ऐसा सम्राट खो दिया जिसके दीर्घकालीन अनुभव, असाधारण योग्यता, संतुलित निर्णय तथा हमेशा सत्य अनुमान का विशेष महत्व था । ” इस प्रकार ब्रिटेन के इतिहास में सम्राट एडवर्ड सप्तम को एक उल्लेखनीय एवं विशिष्टतापूर्ण स्थान प्राप्त था।
हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे ..
- Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Google News ज्वाइन करे – Click Here