गद्य शिक्षण का महत्त्व बताइए।
प्रश्न – गद्य शिक्षण का महत्त्व बताइए।
उत्तर- गद्य शिक्षण का महत्त्व इस प्रकार है-
- दैनिक जीवन में– हमारे अनेक लेनदेन, व्यापार गद्य के माध्यम से सम्पन्न होते हैं। विद्यालयों में गद्य-शिक्षण इन कार्य व्यापारों को कुशलतापूर्वक सम्पन्न करने में सहायक होता है।
- व्याकरण सम्मत भाषा लिखने में—’गद्य कवीनाम् विकषम् वदन्ति’ अर्थात् साहित्यकार की कसौटी गद्य मानी गई है। गद्यकार को व्याकरण के समस्त नियमों का पालन करते हुए लिखना पड़ता है। उसकी भाषा परिमार्जित और परिनिष्ठत होती है। विद्यार्थी जिस समय गद्य को पढ़ता है तो उसकी अपनी भाषा भी व्याकरण सम्मत हो जाती है।
- गद्य की शैलियों की जानकारी के लिए – आज गद्य की नाटक, कहानी, निबन्ध उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, आलोचना आदि अनेक विधाएँ हैं, गद्य शिक्षण से विद्यार्थी साहित्य की इन समस्त शैलियों से परिचित हो जाता है।
- ज्ञानोपलब्धि साधन के रूप में आज गद्य ज्ञानोपलब्धि का प्रमुख साधन है। समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ, ज्ञान विज्ञान की बातें हमें गद्य के रूप में विपुल मात्रा में उपलब्ध हैं।
- भाषिक तत्त्वों की जानकारी के लिए भाषा के तत्त्वों की जानकारी की सरल साधन गद्य है, कविता नहीं। उच्चारण, बलाघात, वर्तनी, शब्द रूपान्तर, उपसर्ग, प्रत्यय, सन्धि, समास, शब्द भण्डार, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, पदबन्ध तथा वाक्य संरचनाएँ आदि भाषिक तत्त्वों का ज्ञान गद्य के माध्यम से सुगमतापूर्वक दिया जा सकता है।
- भावात्मक विकास के लिए—आज गद्य के क्षेत्र में इस प्रकार का प्रचुर साहित्य उपलब्ध है जिसके द्वारा छात्रों का भावात्मक विकास सम्भव है। संस्कारों का परिमार्जन गद्य के माध्यम से सम्भव है। सन् 1986 में घोषित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के भावात्मक विकास पर विशेष बल दिया गया है। विद्यालय में गद्य की विभिन्न विधाओं में सत् साहित्य पढ़ने के अवसर जुटाने की आवश्यकता है ताकि भावात्मक विकास सम्भव हो सके।
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