निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न – निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दें –
एक गुरुकुल था। विशाल और प्रख्यात । उसके आचार्य भी बहुत विद्वान थे। एक दिन आचार्य ने सभी छात्रों को आँगन में एकत्रित किया और उनके सामने एक समस्या रखी कि उन्हें अपनी कन्या के विवाह के लिए धन की आवश्यकता है। कुछ धनी परिवार के बालकों ने अपने घर से धन लाकर देने की बात कही। किंतु, गुरुजी ने कहा कि इस तरह तो आपके घर वाले मुझे लालची समझेंगे। लेकिन, फिर गुरुजी ने एक उपाय बताया कि सभी विद्यार्थी चुपचाप अपने-अपने घरों से धन लाकर दें, मेरी समस्या सुलझ जाएगी। लेकिन, यह बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए। सभी छात्र तैयार हो गए। इस तरह गुरुजी के पास धन आना शुरू हो गया। लेकिन, एक बालक कुछ नहीं लाया। गुरुजी ने उससे पूछा कि क्या उसे गुरु की सेवा नहीं करनी है? उसने उत्तर दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है गुरुजी, लेकिन मुझे ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ कोई देख न रहा हो।” गुरुजी ने कहा, “कभी तो ऐसा समय आता होगा जहाँ कोई न देख रहा हो।” गुरुजी का भी ऐसा ही आदेश था। तब वह बालक बोला, “गुरुदेव ठीक है, पर ऐसे स्थान में कोई रहे न रहे; मैं तो वहाँ रहता हूँ। कोई दूसरा देखे न देखे मैं स्वयं तो अपने कुकर्मों को देखता हूँ।” आचार्य ने गले लगाते हुए कहा, “तू मेरा सच्चा शिष्य है। क्योंकि, तूने गुरु के कहने पर भी चोरी नहीं की। यह तेरे सच्चे चरित्र का सबूत है।” तू ही मेरी कन्या का सच्चा और योग्य वर है। अपनी कन्या का विवाह उससे कर दिया। विद्या ऊँचे चरित्र का निर्माण करती है और उन्नति के शिखर पर ले जाती है।
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दें –
(क) आचार्य ने अपने शिष्यों को बुलाकर क्या कहा ?
(ख) कुछ न ला सकनेवाले शिष्य पर आचार्य क्यों प्रसन्न हुए?
(ग) आचार्य को किस धन की खोज थी? वह उन्हें किस रूप में मिला?
(घ) गुरुकुल के आचार्य किस प्रकार के व्यक्ति थे?
(ङ) लोग उन्नति के शिखर पर कैसे पहुँचते हैं?
(च) इस गद्यांश का एक उचित शीर्षक दें।
उत्तर – (क) कुछ धनी परिवार के बालकों ने अपने घर से धन लाकर देने की बात कही लेकिन यह बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए। (ख) क्योंकि गुरु के कहने पर भी वह शिष्य चोरी कर कुछ न ला सका। (ग) आचार्य को अपनी कन्या के लिए चरित्रवान लड़का चाहिए था। वह उन्हें उस शिष्य के रूप में मिल गया। (घ) गुरुकुल के आचार्य बहुत विद्वान और चरित्रवान व्यक्ति थे । (ङ) लोग उन्नति के शिखर पर विद्या से बने ऊँचे चरित्र से पहुँचते हैं। (च) चरित्र का निर्माण |

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